हम क्यों भाग रहे इस बॉलीवुड के पीछे?
सब क्यों भाग रहे…भागते को अपने पीछे भागने को 70 के दशक में जन्मे हम 80 के दशक तक आते आते फिल्मो के शौक़ीन हो चूके थे…अच्छा तब फिल्मे इतनी आसानी से उपलब्ध न थी….3-4 साल लगते थे एक फ़िल्म को बनने में फिर होती थी प्रदर्शित…..और प्रदर्शित फ़िल्म भी इतनी आसानी से देखने को न मिलती…. एक दो दिन पहले show के टिकट खुद जा कर लाते पापा फिर सिनेमाहाल तक जाने के साधन कि मारा मारी तब कहीं एक फ़िल्म देखते थे….. इसीलिए शायद दर्शक के लिए ये फ़िल्म अलग महत्व रखती थी और इसी बात को समझते हुए फ़िल्म कि पूरी टीम मनोरंजन परोसती थी…. पर अब क्या हुआ? आसान चीज़ों के होने के बाद भी क्यों कर ये फिल्मे मनोरंजन से बढ़कर विवाद क्यों हो गयी हैं? जब बात 70 के दशक से शुरु कि तो राजा हरिश्चंद्र से शुरुआत हुई आलम आरा पहली बोलती फ़िल्म से बढ़ा ये सफ़र आज भटकाव पर क्यों हैं? देखा जाए तो सिनेमा में ऐसा क्या हैं कि तमाशा, नौटंकी, रंगमंच आदि मनोरंजन के स्रोत जब दम तोड़ चूके हैं तो क्यों कर सिनेमा ही लोगों के दिमाग पर छाया हैं? जाहिर सी बात हैं कि एक साथ एक से अधिक इन्द्रियों को प्रभावित करने वाला सिनेमा मस्तिष्क पर सीधा असर डालता हैं तो क...