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अप्रैल 4, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुपर डीलक्स

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रास कुट्टी रास कुट्टी !!!!   सुपर डीलक्स फ़िल्म का दृश्य है  शिल्पा जो कि एक पुरुष है पत्नी बेटे के होते हुए भी अपने अंदर के अर्धनारीश्वर को सन्तुष्ट नही कर पाता और एक रात परिवार को अकेला छोड़ गुमनाम हो लिंग परिवर्तन करा वापस आता ।शिल्पा को समाज ,उसका परिवार पत्नी नही अपना पाते पर उसका पुत्र रासकुट्टी उसे अपनाता है और एक दिव्य ज्ञान देता है। इस दृश्य में रासकुट्टी के खो जाने पर शिल्पा पुलिस स्टेशन जाती जहां का इंस्पेक्टर बर्लिन उसके साथ यौनाचार (ये दृश्य ये दिखाता की जिस समाज में लिंग परिवर्तन से स्त्री बने पुरुष के साथ यौनाचार हो सकता वहां स्त्रियों की क्या दशा होगी) के बाद उसे अपमानित करता है । चोट खाई शिल्पा बर्लिन के सर पर हाथ रख उसे मृत्यु का शाप देती है और चली जाती है ।बर्लिन हँसता है और बोलता हे ईश्वर इसके श्राप के बाद भी जिंदा हूँ  सुपर डीलक्स बुद्धिजीवियों के लिए देखने वाली स्क्रिप्ट है । इस दृश्य के बाद बर्लिन एक दिन अंतराल पर मरता है और ऐसी अचानक की मौत जो बर्लिन को पाप पुण्य सोचने का मौका नही देती । फ़िल्म की स्क्रिप्ट चार अलग चरित्र के जीवन की घटनाओं को साथ ले च...

सन्मार्ग

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ये एक लघु कथा लिखी थी कुम्भ में खींची अपनी ही फ़ोटो पर जोकि एक प्रतियोगिता में भेजी थी।अब तो फिलहाल उस ग्रुप से पंगा कर लिया तो परिणाम न जानना इसलिए यहां प्रस्तुत है। #सन्मार्ग संगम के किनारे पाप के धुलने के अलावा गर किसी चीज़ के लिए माने जाते है तो वो है फोटोग्राफी  के लिए । सूरज की किरणों संग उतरते गंगा में जैसे आग के शोले ,चंद्रमा की शीतलता में हिम से चमकते गंगा के किनारे ,अतिथि साइबेरियन पक्षियों का बुद्धिमान होता वो झुंड और आस्था की तमाम कहानियां निखरते ,निखरे और उभरते हम फोटो प्रेमी की जैसे जीवन रेखा होती है । शास्त्री पूल से संगम के फैले हुए तटों को मैं तकनीकी रूप से याद बना ही रही थी कि तभी कौतूहल से भरी एक वृद्ध आवाज़ आयी  "बिटिया इ डिब्बी उ वाला घाट दिखाई  जहां नहान होत है पुण्य वाला ?? ई डिब्बी पर थोड़ा मुस्कुरा कर मैं चौंकते हुई बोली कौन सा घाट बाबा यहाँ से तो बहुत कुछ दिखाता पर साफ नही क्योंकि ये डिब्बी कैमरा है बाबा दूरबीन नही जो पास करके दिखाए और पुण्य वाला स्नान हर घाट पर होता है आप चाहे अरैल से जाओ या झूंसी से ...आपका कल्पवास किधर है? बड़ी ही रहस्यमय मुस्कान ब...

irul film review

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#irul Irul मतलब डार्कनेस  फहाद की मैं बड़ी प्रशंशक हूँ ।फहाद और साई पल्लवी की athiran मैं इंग्लिश subtitle संग देखने को बेचैन हो पर अभी उपलब्ध नही इसलिए irul का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी कि फहाद और थिरलर कॉम्बिनेशन कुछ धमाल होगा लेकिन डेब्यूटेंट डायरेक्टर नसीफ यूसुफ का निर्देशन फहाद की अदाकारी को उभार कर नही ला सके। जब आप किसी मंझे हुए कलाकार के समान्तर कोई चरित्र गढ़ते अपनी स्क्रिप्ट में तो वो कलाकर भी उतना ही मंझा हुआ होना चाहिए और यहीं निर्देशक अपनी दूसरी गलती करता ।फहाद के सामने soubin साहिर को लेकर। फ़िल्म की कहानी  सिर्फ तीन कलाकरों के बीच घूमती जो कि है फहाद ,soubin और दर्शना । अलेक्स एक थ्रिलर नॉवेलिस्ट है जो कि अपनी पहली नावेल irul को मार्किट ला उसके रिव्यु का इंतेज़ार कर रहा है। अपनी प्रेमिका अर्चना संग वीकेंड बिताने के लिए जाते समय अलेक्स के हादसे के चलते एक घर में फंस जाता जहां उसकी मुलाकात एक अनजान इंसान unni (फहाद ) से होती है । उन्नी से अपने नावेल irul का रिव्यु जानते हुए अलेक्स को अहसास होता हैकि उसके साथ उसकी नावेल जैसा ही कुछ घट रहा लेकिन उस घर में फंसे अर्चना ...