स्त्री फ़िल्म समीक्षा
#stree स्त्री.....स्त्री जो माँ, पत्नी,बेटी,बहु,बहन या एक वैश्या भी होती पर सबसे पहले वो स्त्री होती ।सम्मान ,प्रेम और एक स्थायित्व की भूखी होती है स्त्री। स्त्री फ़िल्म की बात करने से पहले हम "ओ स्त्री कल आना" या नाले बा की बात करते। लोककथा,एक मान्यता या सबसे सटीक एक अंधविश्वास है "ओ स्त्री कल आना"। कर्नाटक और उसके आस पास क्षेत्र में एक प्रथा है कि स्त्री के प्रकोप से बचने के लिए लोग अपने घरों के बाहर लिखते है "नाले बा" कन्नड़ शब्द जिसका अर्थ कल आना ।यहां स्त्री से अर्थ एक काले जादू से भरी स्त्री की आत्मा जो घर के पुरुषों को अपनी अतृप्त इच्छओं हेतु उठा ले जाती उससे बचने को "ओ स्त्री कल आना" लिखते है। अब फ़िल्म पर ........भारतीय सिनेमा में हॉरर फिल्में अपने तरह का हॉरर पैदा करती उस पर गर रामसे brother पर आये तो उनकी फिल्में भय नही जो कामुकता और फूहड़ता पैदा करती कि उससे ये लगता हॉरर फिल्में भारतीये सिनेमा के लिए अभिशाप है और वो भी कॉमेडी हॉरर तो ट्रैन में बंटे अखबार के हालात जैसी होती सिर्फ जूते पोछने के काम आती । ऐसे में एक अंधविश्वास से भरी लोकमान्...