Ammu

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       Bell बजाओ….. घरेलू हिंसा अगर इस शब्द क़ो लूँ तो कोई भी यहाँ इससे अनिभिज्ञ न होगा भले ही वो इसका शिकार हुआ या न हुआ हो पर प्रत्यक्ष दर्शी जरूर रहा होगा यानि कि इस शब्द का नाम लेते ही आपके जेहन में कोई न कोई वास्तविक उदाहरण जरूर आता होगा। इसको अपने जीवन से मैं बाद में जोड़ती पहले यहाँ बात कर लेते 19अक्टूबर क़ो प्राइम पर प्रदर्शित हुई तेलगु मूल कि फ़िल्म अम्मू फ़िल्म कि। यूँ तो फ़िल्म कि स्क्रिप्ट आलिया भट्ट कि रिलीज फ़िल्म डार्लिंग्स जैसी पर एक तुलना करने पर दोनों में वहीँ अंतर नज़र आएगा जो बॉलीवुड और टॉलीवुड में आता और यहाँ मैं तुलनात्मक बात ही रखूंगी। फ़िल्म कि कहानी शुरू होती है अमूधा उर्फ़ अम्मू नाम कि लड़की कि शादी से…अम्मू कि शादी इंस्पेक्टर रवि से होती है जिसे अम्मू बचपन से जानती थी पर ये प्रेम विवाह नहीं है…. अम्मू एक नव विवाहिता के सपने लिए अपने पति के घर आती है पर उसे न पाता था कि ये सपने उसके अपने नहीं।धीरे धीरे उसका विवाहित जीवन अभिशाप बनने लगता है जहाँ बस रोज मारना और दैहिक शोषण जैसी यातना ही रह जाती है……अम्मू ये सब किसी से बता न पाए इसलिए उसका पुलिस पति पुलिस कि तरह उस पर नज़र रखता है….. खुद स्त्री सुरक्षा मिशन bell बजाओ का प्रमुख होने के बाद भी रवि अपनी पत्नी के साथ वही सब करता…. हिम्मत करने के बाद भी अम्मू अपने पति क़ो सजा न दिला पाती कि ये सब रुके…. तभी पति कि यातना के कारण ही अम्मू एक criminal प्रभु से मिलती जो जेल से परोल पर बाहर है और इंस्पेक्टर रवि से दुश्मनी भी है….. अम्मू अब समझ जाती है कि एक कुंठा से पीड़ित पुरुष क़ो समझाना मुश्किल है इसका हल उसे सबक सीखाना ही होगा….. अंत में प्रभु कि सहायता से अम्मू अपने पति न सिर्फ छोड़ती है बल्कि उसे सबक सीखा कर छोड़ती है फ़िल्म डार्लिंग्स भी ऐसे ही घरेलू हिंसा क़ो सब्जेक्ट लिखी गयी थी पर अम्मू का प्रेजेंटेशन और अंत में एक मेसेजज़ देता है वो काफ़ी अच्छा….. फ़िल्म बिलकुल सीधी सपाट चलती फालतू के दृश्य के वहीँ डार्लिंग्स dark comedy में घरेलु हिंसा क़ो लाते मुख्य विषय से दूर चली जाती फिर अंत में कर्मा के कंधे पर सब कुछ रख देत है। (बॉलीवुड अपनी नाटक नौटंकी संजीदा विषयों में भी कहाँ तजता है ) अम्मू कि भूमिका में तेलगु अभिनेत्री ऐश्वर्या लक्ष्मी सही रही…साधारण नयन नक्श संग वो विचलती पत्नी में जंची है…. रवि कि भूमिका में नवीन चंद्र क्रोध दिलाते है….अपराधी प्रभु कि भूमिका में बॉबी सिम्हा के लिए ज्यादा कुछ था यही बात बाक़ी कलाकारों के लिए…. गीत संगीत हिन्दी में डबिंग कि हुई तेलगु फ़िल्म ज्यादातर बेकार होते है IMdb पर दोनों फ़िल्म कि रेटिंग्स लगभग आस पास ही है पर अम्मू क़ो 6.7 से ज्यादा मिल सकता था। अब अपना अनुभव भी लिखती घरेलू हिंसा या martial rape ये ऐसे शब्द है कि इसके दुःख क़ो हम झेल लेते लेकिन इनसे निकलने कि हिम्मत न बटोर पाते….. फ़िल्म के अंत में तलाक के साथ स्त्री क़ो मुक्त और आगे सुखी दिखा देते क्यूंकि यहाँ से उनका जीवन उनका हो जाता है पर सच्चाई ये होती कि इस मुक्ति के साथ शरीर का कष्ट तो ख़त्म हो जाता पर स्त्री मन और स्वाभिमान कि जो चोटे शुरू हो जाती जिसका कोई अंत न होता दरअसल समाज जो कि एक एक सामाजिक प्राणी से मिलकर बनता उसमे एक कि सोच बदलना जैसे एक ही जन्म में रोज़ मरना होता है। क़ानून, लोग सब होते पर सही समय पर कोई कष्ट नहीं हरता बस अपनी सोच थोपने या गिराने आते है….. हाँ सवालों कि एक किताब जरूर तैयार होती 🤷‍♀️… आप चाहें कितनी भी सामजिक संस्थाएं बना लें, महिला आयोग गठित कर लें, डोर bell बजाओ जैसे अभियान चला लें सच यही कि लड़की कि परवरिश में डरना सिखाया जाता और लड़के कि परवरिश में निरंकुश्ता….. ये सोच नहीं बदलेंगी तब घर के दरवाज़ो के पीछे सिसकियों कि आवाज़ आती रहेगी IMdb rating 6.7

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