रूही फ़िल्म समीक्षा
बॉलीवुड स्क्रिप्ट के मामले में कब क्रिएटिव होगा ? मैंने कोई फ़िल्म नही बनाई है पर खाना बनाया है जल्दबाज़ी में भी ,कम सामान संग भी और कम समय में भी ....क्योंकि में वो अपने घर वालों के लिए बनाती इसलिए किसी भी तरह से बनाऊ स्वाद और स्वास्थ्य के लिए अच्छा बना पहली कोशिश यही होती ।अब आप बोलोगे फ़िल्म समीक्षा और मेरी पाक कला का क्या सम्बन्ध ? बताती .... जिस तरह घर के लिए अच्छा खाना बनाकर परोसना मेरा व्यवसाय नही कर्तव्य है इसीलिए उसमें स्वाद होता ही होता सभी मसालों की संतुलित मात्रा के साथ उसी तरह से जब एक निर्देशक एक स्क्रिप्ट राइटर व्यवसाय से इतर सोच फ़िल्म बनाएगा लिखेगा तभी हर बार कहानी नई और पकड़ वाली होगी ।जब दिमाग में व्यवसाय का समीकरण चलेगा तब तो फार्मूला पुराना रख कर ही आंकड़े बदले जाएंगे ताकि लाभ निकल आये फिर चाहे मनोरंजन जाए भाड़ में। रूही फ़िल्म की स्क्रिप्ट शायद स्त्री फ़िल्म की सफलता का खुमार उतरने से पहले दिमाग में आ गयी तभी स्त्री वाले कटोरे में बासी दाल को तड़का लगाकर दर्शको के सामने परोसने की कोशिश की गई है।आप खुद सोचिए जिसकी स्क्रिप्ट का नाम बचकाना था रूहीअफजाना (शायद पहले...