रात अकेली थी
ऑफिस की थकान और ये हाई वे का जाम……. आदित्य को हद से ज्यादा झूँझ लाहट दे रहे थे….. बार बार घड़ी को देखा कर आदित्य कैब ड्राइवर से एक ही सवाल पुछा रहा था “ड्राइवर कितना देर लगे गा?.... क्या लगता है कहाँ तक जाम है?” “भईया हम क्या बतायें…. आपको क्या दिख रहा है….. हम भी वहीँ बैठे है जहाँ आप तो क्या बताये?.... हम को खुद नहीं समझ आ रहा….. अब तक जाम में न फँसे होते तो आपको छोड़ कर दो एक सवारी तो कर लिए होते? “ड्राइवर के जवाब में भी झूझलाहट थी “अरे तो भईया कोई रास्ता निकालिये न…कब तक मैं और आप यूँ ही जाम के खुलने का इंतेज़ार करेंगे “ आदित्य ने भी बात संभालते हुए कहा कि तभी फ़ोन नोटिफिकेशन ने उसका ध्यान हटा दिया “उफ़…. ब्रेक अप के बाद भी इसने मैसेज करना नहीं छोड़ा “ आदित्य ने चिढ़ते हुए कहा यहाँ से कहानी कुछ महीनों पहले कि और मुड़ती है तब जब सोशल मीडिया रिश्ते कि रोज़ नहीं परिभाषा लिखी जा रही थी उन फ़िल्टर चेहरों के बीच जिन्हे खुद कि असलियत नहीं मालूम होती और वही बन जाते कितने और जिंदगियों होने न होने के मालिक लिए तब जबकि आदित्य इंस्टाग्राम का एक उभरता सितारा था……. IT में एक कोडर ह...