पगलैट फ़िल्म समीक्षा
पगलैट कहानी मेरी कही एक बात से शुरू होती है और मेरी कहि बात पर खत्म होती है "जब औरत समझदार होती है तो समाज न समझ हो जाता है " पगलैट में भी इसी को कहा गया हैकि जब एक लड़की को अक्ल आती है तो सब उसे पगलैट कहना शुरू कर देते है। समाज में लोगो के घरों में झांको या न झांको जाने कितने ऐसे बेमेल जोड़े अपनी शादी की 50 वी सालगिरह मना रहे होते जिनके बीच आत्मिक प्रेम,पति पत्नी में समर्पण जैसी भावना होती नही है लेकिन सब ऊपर से ठीक लग रहा है । गृहस्थी की गाड़ी के दो पहिये है साथ चलने लगेंगे ,बच्चा हो जाएगा तो सब ठीक हो जाएगा ,नई नई शादी थोड़ा समय लगता एक दूसरे का होने में या पति ने पत्नी की देह छू ली बस वो गहरा प्यार करता भले ही मुँह पर कपड़ा रखवा या किसी पर स्त्री की देह को सोचते हुए शारीरिक सम्बन्ध बनाता है पर समाज के पलड़े में जो सामान्य तो वो असमान्य होते हुए भी जरूरी है। पगलैट एक ऐसी ही लड़की की कहानी है जिसकी शादी होती सिर्फ इसलिए कि उसने एम ए तक पढ़ लिया और लड़का 70000 महीना कमाता है ।बदकिस्मती से शादी के 5 महीने बाद लड़के की अचानक मृत्यु ।अब मृत्यु के बाद के तेरह दिनों के क्रिया कर्म में एक...