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मई 16, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कपाल क्रिया

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शाम गहराने लगी ...डुबते सूरज संग लोगो की भीड़ भी शमशान से कम होने लगी ।चिता की आग भी लगभग ठंडी होने को ही थी तभी गहरी सोच में डूबे मयंक की तन्द्रा चिता से अस्थि निकालने वाली ने तोड़ी। "भैया जी भैया जी " "हम्म हाँ बोलिये " मयंक थोड़ा सकपता सा बोला  "भैया जी हिन्दू रीति रिवाज से दाह संस्कार हो रहा तो क्रिया बाकी रह गयी उसी के लिये बोल रहे" "क्रिया?.....अब क्या बाकी है अस्थि लेने के अलावा "मयंक ने झुंझलाते हुए कहा  "कपाल क्रिया …..चिता की आग बुझने से पहले पुत्र को मृतक की कपाल क्रिया करनी होती यानी कपाल को डंडे से छिन्न करना होता वार्ना मरने वाले को मुक्ति न मिलती " "क्या करना होगा ? कपाल को छिन्न क्या?"मयंक ने घबराते हुए पुछा "रुकिए हम करवा ही देते वरना कर्म कांड वाले हम को बोलेंगे पाप करवा दिए ….." शमशान की क्रिया करवाने वाले ने मयंक के हाथ में एक डंडा थमा दिया और बोला "इसे कसके पकड़े और चिता के कपाल को फोड़ना है एक प्रहार से ताकि आत्मा को मुक्ति मिले " "क्या" दबी सी चीख के संग मयंक बोला और उसके हाथों स...

house of death part 2

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भाग 2 "ये क्या मज़ाक है ?परेशान एक अजनबी से ये किस तरह का मज़ाक है ? अनिकेत दर्द और डर से चिल्लाया तभी कमरे में भयानक अंधेरा छा जाता है खुले दरवाज़े बन्द होने लगते और उन तीनों के हँसने  की डरावनी आवाज़ तेज़ होने लगती । अंधेरे में अनिकेत दरवाज़े की तरफ भागता है लेकिन दरवाजा बन्द होता ।कमरे में भयानक डरावनी आवाज़ें गहराने लगती जो जैसे कोई संदेश दे रही हो वो रहस्यमयी डरावनी आवाज़ तेज़ होती जा रही " तुम यहाँ खुद से नही आये हो तुम्हे मैंने बुलाया है अपने इस घर में जहां से तुम जा नही सकते .....नही नही जा सकते " वो डरावनी आवाज़ औरत की चीखती हुई गुम हो जाती है और अचानक कमरा फिर रोशनी से भर जाता है लेकिन ?? लेकिन ये क्या वो लड़की वो वृद्ध उसकी पत्नी कोई नही है कमरे और दरवाज़े खिड़कियां बन्द  अनिकेत बेतहाशा डर के साथ चिल्लाते हुए दरवाज़े की हैंडल को घुमाने लगता है "खोलो दरवाजा खोलो " तभी दरवाज़े के दूसरी तरफ पैरों की आवाज़ आनी शुरू होती ।अनिकेत चुप हो दरावाज़े से पीछे हटने लगता कि तभी दरवाज़ा खुल जाता है । खटक !!!! गलियारे में सिर्फ मोमबत्ती की रोशनी और रोने की आवाज़ जो दूसरे कमरे से आ रही...

house of death part 1

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House of death मनाली की बर्फीले सड़क पर जब रात का साया गहराता है तो एक अनजाना से भय चारों ओर फैलने लगता है।डर मौत का ....डर अनजाने सायों का ....उफ ये काली रात कितनी भयवाह होती है अपने अनसुलझे रहस्य लिए हुए कोहरे में गुम ये सुनसान सड़क और ये कार  घर्रर्ररर....घर्रर्ररर "उफ़्फ़ मनाली की बर्फीली सर्द रात और मेरी कार का ये नाटक" कार के इंजन  को स्टार्ट करने असफल कोशिश करते हुए अनिकेत झल्लाया "लगता है आज यही ठंड से मेरी कब्र बनेगी " गुस्से और नाकामी संग खुद से बात करते हुए अनिकेत कार से उतरा और खुद को सिमेटते हुए सड़क के किनारे किसी देवदूत के आने का इंतज़ार करने लगा खुद को गर्म करने के लिए सिगरेट का कश लेने की उम्मीद से जेब  टटोली पर नाकामी ही हाथ लगी  "Shit इसे भी न मिलना था अभी ...आज तो लगता है बस अपनी मौत का इंतज़ाम कर निकल हूँ" सर्द बर्फ़ीली रात में यूं फँसना अनिकेत के दिल और दिमाग पर हावी हो चुका था।सड़क के किनारे गाड़ी पार्क कर अनिकेत किसी मदद की उम्मीद में सड़क के ढलान वाले मोड़ की ओर बढ़ने लगा । दिमाग ठंड से सुन्न हो रहा था लेकिन अनिकेत के कदम तेज़ी पर थे "आह .....