बचपन कि यादों कि खट्टी मिट्ठी कैरियां ले लो ............
बचपन कि यादों कि खट्टी मिट्ठी कैरियां ले लो ............ ये दौलत भी ले लो , ये शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज़ की कश्ती , वो बारिश का पानी ....................खुबसूरत ग़ज़ल के वो बोल जो मुझे मेरे बचपन कि यादों के उस भरे मैदान में ले जानते हैं जहाँ जा कर मैं जी भर कर खेलती हूँ I बचपन किसी का भी हो ....किसी खरीदी हुयी ख़ुशी का मोहताज़ नही होता है ...वो मोहताज़ होता है ..कुछ ममता भरे पलों को .....मुट्ठी भर बाबूजी कि डांट का .........भाई के लिए कि हुई चुगलियों का .......मई की सुहानी सुबह में खुली आँगन में कन्नेर के पेड़ पर कोयल के कूकने का ..बचपन मोहताज़ होता है आज़ादी का ..शरारत करने की आज़ादी की.....हर ऐसी खट्टी मिट्ठी यादों का मोहताज़ होताहै बचपन ...बचपन मोहताज़ होता है आज़ादी ,ढेर सारी आज़ादी का .........आज़ादी शरारत करने की ......... आज़ादी डांट के बाद रोने की ...... ...