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बचपन कि यादों कि खट्टी मिट्ठी कैरियां ले लो ............

  बचपन कि यादों कि खट्टी मिट्ठी कैरियां ले लो ............ ये दौलत भी ले लो , ये शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज़ की कश्ती , वो बारिश का पानी ....................खुबसूरत ग़ज़ल के वो बोल जो मुझे मेरे बचपन कि यादों के उस भरे मैदान में ले जानते हैं जहाँ जा कर मैं जी भर कर खेलती हूँ I बचपन किसी का भी हो ....किसी खरीदी हुयी ख़ुशी का मोहताज़ नही होता है ...वो मोहताज़ होता है ..कुछ ममता भरे पलों को .....मुट्ठी भर बाबूजी कि डांट का .........भाई के लिए कि हुई चुगलियों का .......मई की सुहानी सुबह में खुली आँगन में कन्नेर के पेड़ पर कोयल के कूकने का ..बचपन मोहताज़ होता है आज़ादी का ..शरारत करने की आज़ादी की.....हर ऐसी खट्टी मिट्ठी यादों का मोहताज़ होताहै बचपन ...बचपन मोहताज़ होता है आज़ादी ,ढेर सारी आज़ादी का .........आज़ादी शरारत करने की  ......... आज़ादी डांट के बाद रोने की ......                  ...

अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो

बाबुल मैं तेरे आँगन की भोर , मेरी साँझ की चिंता मत कीजियो , जीवन दिया है मेरे तन को , जी भर के मन को सांस भी लेने दीजियो , बाबुल मैं तेरे आँगन की कोयल , कुहुक में विदाई का गीत मत भर दीजियो , लक्ष्मी हूँ सरस्वती के स्वर से  मेरे मन मंदिर को सुर दीजियो , बाबुल मैं तेरे घर की सोन चिरैया  पराया धन कह कर मोहे  एक क़ैद न दीजियो , कौन देश भी जाऊं तेरा मोह न बिसर पाऊ एक बार तो मोहे कलेजा का टुकड़ा समझ कर सीने से लगने दीजियो , बाबुल मैं तेरे जीवन की डोर पराये हांथों की पतंग मत कीजियो ,

रा- वन ....एक खोज

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रा-वन ..........वैज्ञानिक परिकल्पनाओ पर आधारित बॉलीवुड मसाला फिल्म ,  एक्शन ,गीत संगीत ,गलेमर  से सजी  मनोरंजन से भर पूर फिल्म ,ये शायद एक सामान्य फिल्म समीक्षा  होगी पर मेरे  आधार पर इसकी समीक्षा थोड़ी और विस्तृत होगी .......देखा जाइये तो यह फिल्म एक पूरे कंप्यूटर गेम पर आधारित थी ....एक कंप्यूटर गेम जिसकी कोडिंग जीरो और वन के रूप (binary code ya machine code ) की जाती है जिसे कोई प्रोग्रामर या ड़ेवेलोपेर सामान्य मानव की भाषा में alphanumeric  शब्दावली में syntax के द्वारा कोड करता है .....ये कोड किस पर से इंसानी सर ज़मी पर लाखों कोशिकाओं के समूह या उतक संरचना ,माईटरोकानडेरिया में परिवर्तित हो कर एक असाधारण मानव बन जाती है हो सवयम प्रोग्रामर या ड़ेवेलोपेर के जान का दुश्मन और समाज के लिए घातक हो जाता है ..यहाँ तक की इस खलनायक रुपी प्रोग्रामिंग नष्ट करने के लिए एक दूसरी प्रोग्रामिंग के दवरा एक नायक भी तैयार  किया जाता है जो की न सिर्फ मनुष्य की तरह चलता फिरता है खाता है पीता है ...बल्कि नायिका के साथ नृत्य संगीत कालुफ्त भी  उठाता है (हाजमोला सर क...