गुड़गांव फ़िल्म
"गारेंटी तो यहाँ किसी की नही ,न तेरी न मेरी" मैं यहाँ गुरुग्राम की नही ....गुडगाँव मूवी की बात कर रही हूँ ....मूवी जहाँ से शुरू होती है मैं भी गुडगाँव को उसी से शुरू करती हूँ अपनी बातों को .......नदी में डूबी एक कार निकलती है बेक ग्राउंड "जो पाया वो कोई पाया , जो न पाया वो गयो जान से" ......एक शहर जो अपनी नब्ज़ खो चूका है जीने की ,रिश्तों में प्रेम की और इंसानियत की ....यहाँ की दलदल में जो डूबा वो उबरा जो तैर गया वो गया जान से ......कहानी फ़्लैश बेक में चलती है और इतनी wisely चलती है की दर्शक का एक वर्ग ही लिंक हो पता है वर्तमान और भूत में ......फिल्म इतनी ज्यादा यथार्थ है की कहीं कहीं बहुत स्पष्ट है और कामर्शियल सिनेमा मतलब फुल नौटंकी ... kehri singh(पंकज त्रिपाठी) gurgaon के माने हुए बिल्डर हैं उनकी एक जमीन है gurgaon में जो उन्होंने अपनी बेटी प्रीतो (रागिनी खन्ना ) के ऑफिस के लिए रख छोड़ी है और एक दिन प्रीतो इसी जमीन के नाम पर किडनैप हो जाती है ...फिर शुरू होता है रिश्तों और विश्वास का खून होना ....और फिल्म का अंत ,वो एक ट्विस्ट पूरी फिल्म को अचनक एक गति दे...