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आत्माएं होती है कि नही ?
उनका अस्तित्व क्या सच में है?
है कि वो मन का वहम है?
ये सब किस की जिज्ञासा का विषय नही और कुछ लोगो के लिए तो ये कौतूहल का विषय स्तर तक जिसे पागलपन कहते है वहाँ तक है ।
कुछ इसी को समेटते हुए 2011 में प्रदर्शित फ़िल्म 404 की स्क्रिप्ट है। कई फिल्मों को देख लगता इस लेवल तक भारतीय निर्देशक जा पाते है ?
वहम और मानसिक रोग के बीच के एक बहुत महीन अंतर को ले ये स्क्रिप्ट लिखी गयी और अंत
उफ्फ्फ
फ़िल्म शुरू होती है एक मेडिकल कॉलेज के न्यू सेशन से । फर्स्ट ईयर स्टूडेंट अभिमन्यु (राजवीर अरोड़ा) और उसके बैच मैट की सीनियर स्टूडेंट कृष (इमदाद शाह पुत्र डरे हुए दूसरे शाह) और उसके batchmate सीनियर बुरी वाली रैगिंग लेते है । रैगिंग के खेल से ऊब राजवीर होस्टल का रूम बदलने का फैसला लेता है और उस कमरे 404 को चुनता है जो तीन साल से बंद पड़ा है क्योंकि उसमें तीन वर्ष पूर्व रोहित नाम के स्टूडेंट ने आत्महत्या कर ली थी औरइसलिए बाकी स्टूडेंट उस कमरे से दूर रहते थे क्योंकि उन्हें वहां रोहित की आत्मा नज़र आती है । होस्टल प्रबंधन से अभिमन्यु को वो रूम दिलवाने में प्रोफेसर अनिरुद्ध (निशिकांत कामत) मदद करते क्योंकि वो खुद चाहते विग्यान के इस दौर में लोग आत्मा के वहम से निकले लेकिन कृष की रैगिंग का खेल अभिमन्यु के जीवन में रोहित की आत्मा की उपस्तिथि पूरी तरह ला देती है ।धीरे धीरे अभिमन्यु का मानसिक स्तर इस रैगिंग और रोहित की आत्म के सच के साथ उस मानसिक बीमार कर देते है प्रोफेसर अनिरुद्ध की पत्नी मीरा(टिस्का चोपड़ा ) अभिमन्यु की मदद करना चाहती पर अभिमन्यु इनसे परे जा ये साबित करता है कि वहम और विज्ञान से भी परे है जीवन मृत्यु का सच ।
फ़िल्म में हम सतीश कौशिक और टिस्का चोपड़ा (अंकुर अरोरा मर्डर केस फेम ) के सिवाय किसी को नही पहचान पाते हांलांकि सब थिएटर या tv कलाकार है ।निशिकांत कामत मराठी रंग मंच के जाने माने कलाकार है।
इन सब से प्रमुख हैँ इमदाद शाह.।रत्ना पाठक शाह और नसरुद्दीन शाह के बड़े पुत्र इमदाद ने गिन चुन कर 3-4 फ़िल्म की है ।वैसे वो थिएटर आर्टिस्ट है और वही गीतकार संगीतकार भी।
इस फ़िल्म एक आवारा अय्याश सीनियर मेडिकल स्टूडेंट की भूमिका में बिल्कुल सही लगे क्योंकि डरे हुए शाह के ये बेटे को देख कर भी डर लगता ये सीरियल में ड्रग एडिक्ट बने कलाकार सलीम ग़ौस की याद दिलाते है।
बाकी फ़िल्म में सबसे मुख्य 20 मिनट का वो अंत का ट्विस्ट ।उम्दा
अचानक से समझ आता जो दिखता है वो वहम नही होता और वहम कभी दिखता नही ।
गर आसानी से उपलब्ध हो ऑनलाइन तो इस फ़िल्म को जरूर देखें।
IMdb rating 7.2/10
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