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ब्रह्मास्त्र

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"काजल कि स्याही से लिखी हैँ तूने जाने कितनो कि लव  स्टोरियाँ " जब ब्रह्मास्त्र का ये गीत रिलीज हुआ तभी समझ जाना चाहिए था कि ये फ़िल्म क्या होगी? क्या यहाँ ये न हो सकता था "काजल कि स्याह रातों से छिनी हैँ तूने कितनो कि नींदे गोरिया " ठीक इस तरह ब्रह्मास्त्र शब्द का प्रयोग करने से पहले थोड़ा और हिन्दू धर्म पौराणिकता पर रिसर्च क़र लेते तो बेशक फ़िल्म इसे बहुत ही उमदा  बनती। फ़िल्म कि कहानी कहाँ से लिया इसका कोई ओर छोर न मिला रहा…. अयन मुख़र्जी के स्क्रिप्ट पर काम से मुझसे धन्नू शाह वाली कविता याद आ गयी…. अगर किसी को पता हैँ तो कमेंट क़र जरूर बताये वरना मेरे जेहन कि छोटी अमृता को जितना याद वो बताती…. धन्नू शाह कविता लिखने के अलावा कुछ करते न थे इससे गुस्सा हो उनकी पत्नी नें रातको घर से बाहर क़र दिया.. अब धन्नू शाह रात कि यात्रा में चोर, कुत्ते आदि सबकी हरकत को कविता में लिखते चले जिसको पढ़ते पढ़ते वो राजा के दरबार पहुंचे और राजा नें उनकी अजब सी कविता पर इनाम दिया जिसे ले धन्नू शाह ख़ुशी 2घर आगये तो बस भाई अयन मुख़र्जी नें यही किया.। हमारे ग्रंथो से असुर,देव, ब्रह्मास्त्र अस्त्र आदि...