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अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो

बाबुल मैं तेरे आँगन की भोर , मेरी साँझ की चिंता मत कीजियो , जीवन दिया है मेरे तन को , जी भर के मन को सांस भी लेने दीजियो , बाबुल मैं तेरे आँगन की कोयल , कुहुक में विदाई का गीत मत भर दीजियो , लक्ष्मी हूँ सरस्वती के स्वर से  मेरे मन मंदिर को सुर दीजियो , बाबुल मैं तेरे घर की सोन चिरैया  पराया धन कह कर मोहे  एक क़ैद न दीजियो , कौन देश भी जाऊं तेरा मोह न बिसर पाऊ एक बार तो मोहे कलेजा का टुकड़ा समझ कर सीने से लगने दीजियो , बाबुल मैं तेरे जीवन की डोर पराये हांथों की पतंग मत कीजियो ,