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मेरी_बेलन_टाइट_और_मैं

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वेलेंटाइन की सुबह चाय के लिए टेबल पर पेपर सुड़कते पति ने कनखियों से झांकते हुए पत्नी से कहा " सुनो इधर आओ " पत्नी ममता के जैसा मुह बनाते हुए आयी बोली "क्या है" पति ने रोमांटिक होते हुए पूरी बत्तीसी दिखा कर कहा "हैप्पी वैलेंटाइन डे ।एक किस मिलेगी क्या ?  "उनहूँ ये क्या है मुह में लहसुन की खेती की हो क्या ?इतनी बास "पति का इश्क़ का भूत लगभग बेहोश होते होते चीखा पत्नी ने भी माया बहन जी वाला रूप इखितियार करते हुए कहा " भूख लगेगी तो इंसान अचार चटनी संग पराठा खायेगा ।भूख वैलेंटाइन फलन टाइन नही जानती समझे । "उफ़ ।अरे यार स्प्रे मिंट तो छिड़क लेती मुह में या फिनायल से ही गरारा कर लेती ।कोई तो कम होता ,अब नाश्ता लाओ ।मैं भी मूड का और सत्यानाश नाश्ता खा कर करूँ दो जल्दी। फटाक धम्म ,जैसे किसी ने पड़ोसी देश पर बम फ़ेका हो बीवी ने इस अंदाज़ में टेबल पर प्लेट रखी "लो ठुंसो " "ये क्या है ?अचार पराठा दही ,,,,,अरे कुछ और भी बना दिया करो प्लेट में भी खुद को परोस दिया हैं" पति ने बुझे अंदाज़ में कहा "हाँ भाई जब गले पड़ी हो आशा तो कहाँ मिले बिपा...

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आत्माएं होती है कि नही ? उनका अस्तित्व क्या सच में है? है कि वो मन का वहम है? ये सब किस की जिज्ञासा का विषय नही और कुछ लोगो के लिए तो ये कौतूहल का विषय स्तर तक जिसे पागलपन कहते है वहाँ तक है । कुछ इसी को समेटते हुए 2011 में प्रदर्शित फ़िल्म 404 की स्क्रिप्ट है। कई फिल्मों को देख लगता इस लेवल तक भारतीय निर्देशक जा पाते है ? वहम और मानसिक रोग के बीच के एक बहुत महीन अंतर को ले ये स्क्रिप्ट लिखी गयी और अंत  उफ्फ्फ फ़िल्म शुरू होती है एक मेडिकल कॉलेज के न्यू सेशन से । फर्स्ट ईयर स्टूडेंट अभिमन्यु (राजवीर अरोड़ा) और उसके बैच मैट की सीनियर स्टूडेंट कृष (इमदाद शाह पुत्र डरे हुए दूसरे शाह) और उसके batchmate सीनियर बुरी वाली रैगिंग लेते है ।  रैगिंग के खेल से ऊब राजवीर होस्टल का रूम बदलने का फैसला लेता है और उस कमरे 404 को चुनता है जो तीन साल से बंद पड़ा है क्योंकि उसमें तीन वर्ष पूर्व रोहित नाम के स्टूडेंट ने आत्महत्या कर ली थी औरइसलिए बाकी स्टूडेंट  उस कमरे से दूर रहते थे क्योंकि उन्हें वहां रोहित की आत्मा नज़र आती है । होस्टल प्रबंधन से अभिमन्यु को वो रूम दिलवाने में प्रोफेसर अनिरुद्...