मेरी_बेलन_टाइट_और_मैं
वेलेंटाइन की सुबह चाय के लिए टेबल पर पेपर सुड़कते पति ने कनखियों से झांकते हुए पत्नी से कहा " सुनो इधर आओ "
पत्नी ममता के जैसा मुह बनाते हुए आयी बोली "क्या है"
पति ने रोमांटिक होते हुए पूरी बत्तीसी दिखा कर कहा "हैप्पी वैलेंटाइन डे ।एक किस मिलेगी क्या ?
"उनहूँ ये क्या है मुह में लहसुन की खेती की हो क्या ?इतनी बास "पति का इश्क़ का भूत लगभग बेहोश होते होते चीखा
पत्नी ने भी माया बहन जी वाला रूप इखितियार करते हुए कहा " भूख लगेगी तो इंसान अचार चटनी संग पराठा खायेगा ।भूख वैलेंटाइन फलन टाइन नही जानती समझे ।
"उफ़ ।अरे यार स्प्रे मिंट तो छिड़क लेती मुह में या फिनायल से ही गरारा कर लेती ।कोई तो कम होता ,अब नाश्ता लाओ ।मैं भी मूड का और सत्यानाश नाश्ता खा कर करूँ दो जल्दी।
फटाक धम्म ,जैसे किसी ने पड़ोसी देश पर बम फ़ेका हो बीवी ने इस अंदाज़ में टेबल पर प्लेट रखी "लो ठुंसो "
"ये क्या है ?अचार पराठा दही ,,,,,अरे कुछ और भी बना दिया करो प्लेट में भी खुद को परोस दिया हैं" पति ने बुझे अंदाज़ में कहा "हाँ भाई जब गले पड़ी हो आशा तो कहाँ मिले बिपाशा "
भड़ाम दूसरा बम गिरा अबकी बार बीवी का हाथ और टेबल यार
और नॉनस्टॉप मन की बात शुरू
"बिपाशा चाहिए हाँ ,उसके हाथ का खाना चाहिए ,स्प्रेमिन्ट फूंका हुआ होठं चाहिए हाँ तो तब काहे चाय की चुस्की लेते है सीधे बैल की तरह सर हिला दिए जब हमें देखने तुम्हारीं अम्मा आयी थी और देखने के बाद ढाई दर्जन चूड़ी वाला हाथ हिला कर निरूपा रॉय की डिमांड की थी .....तब तो न बोले और अब देखो इन्हें चाइये आधी ढकी पूरी खुली बिपाशा ।बनायेगी क्या वो हाँ ,,,,,,बोलो बोलो .....जो हो वही प्रमाणित कर देगी मने उल्लू बनायेगी और क्या .....चार सुखी डंडी में दो पनीर,एक शिमला मिर्च को दो घंटे में जला कर अपनी चिकन तंदूरी लेग्स के साथ लायेगी तो तुम्हारा पेट भर जायेगा हैं जबकि उसके लेग्स तुम खा न सकते और वओ जो बनायेगी वओ खाने लायक न होगा पर यब आत्मा तृप्त होगी तुम्हारीं है न ...हैं न ...चुप क्यों हो बोलो अब "
पति सकपकाया और सहमा हुआ सर हाँ से भी हिल रहा न से भी "न न तुम गलत समझ ली।मैं तो बस छेड़ रहा था तुम्हे "
"फिनायल पिला के छेड़ते हो ।ठीक है आने दो सासु माँ को तुम्हारा ईजाद किया हुआ माउथवाश रुपी फिनायल न कराया तो मैं भी आशा नही समझे और बिपाशा चाहिए अरे तो खुद भी डीनु मौर्या बनो चलो वो न सही जॉनी लीवर ही बन जाओ हँसी तो आये तुम्हे देख ।हालात देखि है खुद की महीने के चार शर्ट बर्तन वाले को देती हूँ थान भर कपडे में भी तोंद न जात्ती फिर हर महीने नई बनवाओ तोंद तो राहुल की जुबान हो गयी थमेगी न और हाँ कल सुबह जब झुक गमलों में पानी डाल रहे थे तो तोद से चढ़ी शर्ट पीछे से चड्डी के ब्रांड की चुगली कर रही थी ।ये सब लक्षण बिपाशा के अब्बा बनने वाले है न की आशिक़ बनने के " पत्नी जवालामुखी पूरी तरह लावा उगल रहा है " हो गयी सुबह ,,,,,वैलेंटाइन मनाओगे न .......शाम को 50000 के खर्चे के बाद आधी टांग वाली बिपाशा मिलेगी पर उसकी पहुँच का गिफ्ट लेके ही घर धमकना और हो सके तो बीस किलो का ये पेट भी अंदर कर के आना और हाँ काम वाली भी नही आएगी आज तो फाइव स्टार होटल से खाना भी पैक करवा लाना ......आना करवाती हूँ तुम्हे बेलन टाइट कैंडल लाइट डिनर ....आना "
तीसरा बम फूटा किचन में बर्तनों के साथ कुश्ती शुरू पत्नी की ....
पति देव अथः श्री वैलेंटाइन कथा की समाप्ति पर सुख चुके पराठे को दही संग निगलते हुए सामने पड़े पेपर पर बिपाशा की अदा को कोसते हुए मिमियाते है "सुनो गुस्सा कम हो गया हो तो काली पड चुकी चाय भी दे दो you know naa बिना चाय नाश्ता नही डाइजेस्ट होगा "
और इसी के साथ एक वैलेंटाइन बेलन टाइट डे में बदल जाता है ।
नारायण नारायण
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