धड़क
"सैराट" शब्द का अर्थ हिंदी में कोई उपयुक्त शब्द नही पर अनियंत्रित या wild या uncontrollable कह सकते ।
सैराट मतलब वो जो उन्मुक्त हो,स्वत्रंत स्वछंद हो ,बेखौफ हो या सीधे कहे प्रेम में हो।
मैं धड़क की बात करूं तो सैराट की बात जरूरी पर सैराट से धड़क की तुलना करूँ ये पाप होगा ।मैं यहां सैराट के अंतिम दृश्य से धड़क को शुरू करूँगी ।
दृश्य है आर्ची और parshya की हत्या हो चुकी ऑनर किलिंग के चलते ।दोनो के शव पड़े है सब शांत है ।अर्चि parshya का 2साल का बेटा रोते हुए उनके शव के पास जाता है ।उसके नन्हे नन्हे पाँव खून के निशान छोड़ते हुए जारहे है ।मैंने यहां नागराज मंजुले को पढ़ा और ये पढ़ा कि समाज की कुरीतियों के नाम पर हमारी हर पीढ़ी का अंत खून से सना है गर वो उन्मुक्त है ।
धड़क को मैं सीधे सीधे nepotism का उत्कृष्ट उपहार कहूंगी बॉलीवुड को और दर्शकों के लिए । निर्देशक शशांक खेतान ,खेतान पंखों के खानदान से इधर उधर पढ़ पुढ चले आये सैराट के नाम पर खुद को स्थापित करने ।जहान्वी कपूर , जहान्वी अपनी माँ श्रीदेवी की झलक बिल्कुल नही लाती बल्कि एक अजीब सी खुनस लाती ।जहान्वी को प्लास्टिक सर्जरी की बहुत जरूरत खास कर होठों और आंखों के लिए ।ईशान की ये दूसरी फिल्म है beyond the clouds के बाद ।वो मासूम लगते पर शशांक उन्हें चमका न सके ।
फ़िल्म सैराट से बहुत अलग जोधपुर के सुंदर और मनोहारी छटा संग शुरू होती | पार्थवी (जहान्वी कपूर) ,उदयपुर के ठाकुर (आशुतोष राणा ) की बेखौफ पुत्री है जो निम्न जाति के रेस्टोरेन्ट के मालिक के बेटे मधुकर(ईशान खट्टर) से प्रेम करने लगती ।प्रेम के खूबसूरत पलों के साथ दोनो को समाज की कटुता भी मिलती ।पार्थवी से प्रेम की सज़ा पा रहे मधुकर को जब पुलिस हत्या के लिए ले जा रही होती तभी पार्थवी उसे पुलिस के चंगुल से छुड़ा भगा ले जाती ।मज़बूरी में ये भागे ये प्रेमी प्रेम से परे की सचाई ,पैसों की कमी, संमझ के उतर चढ़ाव से डूबते उबरते 5 साल का जीवन जी एक सुखी पति पत्नी के अलावा 2 साल के बेटे माता पिता भी बन जाते। एक दिन पार्थवी अपनी माँ (शालिनी कपूर)सर बात करती रहती है तभी उसके पिता रत्न सिंह को पता लग जाता और यहीं से लिख जाती मधुकर और बेटे की मौत ।
शशांक खेतान जी written by लिखने से आप महान नहींहो सकते ।जब पूरा सैराट को निचोड़ा तो अंत क्यूँ इतना बुरा किया?
जहान्वी को बहुत मेहनत करनी होगी बहुत।ईशान भाई की तरह लड़कियों के दिल पर राज कर सकते पर कोई सही डायरेक्टर ही ये कर सकता।इससे बहुत अच्छा काम आपने beyond the clouds फ़िल्म में किया । आशुतोष राणा ,स्वार्थी और दंभी ठाकुर की भूमिका में जंचे है । कोलकता के लॉज वाले दादा (kharaj mukharajee )जी को मैंने कहानी फ़िल्म के बाद देखा अच्छे लगे।बाकी कलाकार अधिकतर tv के जो विशेष प्रभाव नही छोड़ते।
सैराट की भी खूबसूरती अजय अतुल का संगीत था इस फ़िल्म की खूबसूरती भी अजय अतुल का संगीत है ।सभी गीत अच्छे बस शशांक भाई जे बताओ राजस्थान की पृष्ठभूमि में मराठी झिंगाट शब्द कैसे आया?
आप जानते थे फ़िल्म एडॉप्शन की बैसाखी पर ईशान और जहान्वी को खिंचेगी तब भी आप ने स्क्रिप्ट पर पकड़ न बनाई ।
सैराट की कहानी और अजय अतुल के संगीत के बाद फ़िल्म में कुछ है तो छायांकन ,उदयपुर और कोलकत्ता को इतना सुंदर दिखाने के लिए ।
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