AWE movie

#awe
ईश्वर क्या है?

कैसा होता होगा उस सर्वोपरि का व्यक्तित्व ? वो कितना असाधारण होगा जो सबके दर्द को समझता होगा ? कितना शांत होगा वो सब के हल के संग?

ऐसे एक व्यक्ति की कल्पना कीजिये जो कहीं भी बैठे किसी भी इंसान के दर्द को संमझ रहा सुन रहा और समस्या सबके पास और सबकी समस्या को।सुनना समझना आसान है ?
न बिल्कुल नही ये सीधे सीधे मनोरोग कहलायेगा और वो मनोरोगी।

खैर ऐसे ही किसी तथ्य और रहस्य जुड़ी एक अद्भुत तेलगु फ़िल्म awe की मैं बात करती । एक मित्र ने मुझे सलाह दी इसे देखने की और अहोभाग्य की मैं इस पर लिखूं तो आवश्यक था कि ये फ़िल्म देखूं और लिखूं।

शुक्रिया मित्र,भारतीये सिनेमा के कोहिनूर से रूबरू करने के लिए ।फ़िल्म बहुत उम्दा सब देखें इसकी सलाह सँग मेरी बात

Awe का मतलब अन्तरयुद्ध

फ़िल्म का दृश्य एक संदेह से भरी स्त्री काली (काजल अग्रवाल) और उसके साथ घूम रही कई और कहानियों सँग शुरू होता है । फ़िल्म शुरू होती है पहली कहानी राधा(esha rebba) और कृष्णा(नित्या मेनन )के लेस्बियन रिलेशनशिप से जहाँ राधा बचपन में यौन शोषण से पीड़ित हो पुरुष से नफरत करते हुए एक लड़की से प्रेम कर बैठती और माता पिता को समझा उससे समलैंगिक विवाह करना चाहती।दूसरी कहानी है आत्म मुग्ध जादूगर(मुरली शर्मा) और उसके भरम को तोड़ने वाली छोटी लड़की की।एक कथा है नाला (प्रियदर्शी ) की जो असफल है पर भाग्य से सब कुछ चाहता ।आश्चर्यजनक रूप से एक गोल्ड फिश (नानी )और एक पेड़ (राजा तेजा) उसको आत्म ज्ञान करवाते।इसी तरह दो और समानांतर कथा भी एक चक्र की तरह काली के आस पास घूमती रहती है ।
हर कहानी अपने रहस्य को गहराते हुए मुख्य पात्रों सँग आ पास में जुड़ती जाती जहां सब अनिभिज्ञ है अपने आदि अंत से पर काली जानती है ।

अंत सोच से परे एक अंत के सँग सारी कहानियां आ पास में जुड़ काली को मुक्त करती है ।

ये स्क्रिप्ट बेस्ड है ऑस्ट्रेलियन मूवी predestination पर जिसे मैंने नही देखा पर अब देखूंगी इसलिए अभी सीधे फ़िल्म पर।

गर्व महसूस होता जब भारतीय सिनेमा ऐसी स्क्रिप्ट सँग जगमगाता ।फ़िल्म जब आप देखेंगे तो शास्त्रों के कुछ तथ्य की प्रस्तुति भी दिखेगी। 6 कहानियां सँग चलती पर उलझती नही और न ही दर्शक को कंफ्यूज करती बल्कि प्रशान्त वर्मा के सधे निर्देशन में हर दृश्य ,हर कहानी अब आगे क्या की मनोस्तिथि को पकड़े रखती ।मैं खुद इसे बिटिया सँग देख रही थी जब तो बीच में खाना बनाने जाना था पर मन ही न हुआ कि बिना अंत देखे हटूं।
कलाकारों की भीड़ सब तेलगु सिनेमा के चेहरे जिसमे काजल अग्रवाल से आप मिल चुके(स्पेशल 26 और सिंघम)....और मैं फ़िल्म के प्रोड्यूसर और सूत्रधार नानी से (सुपर खिलाड़ी 6 के द्वारा)..कलाकारों को सिर्फ पात्रों के हिसाब से खुद को रखना था जिसमे मेकअप की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

अंत में ज्यादा कुछ नही बस इतना मोक्ष ,आत्मा ,मुक्ति ,जीवन चक्र इनसब को ले आपको निरुत्तर करती बहुत सारे प्रश्नों के सँग ।

फ़िल्म देखिये और इस पोस्ट आपका क्या सवाल है फ़िल्म को देखने के बाद ये जरूर बताएं।

(फ़िल्म नेटफ्लिक्स पर तेलगु में इंग्लिश subtitle सँग है और you tube में हिंदी dubbed)


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