महाकाव्य के प्रसंगो का फ़िल्म स्क्रिप्ट में एडॉप्शन का तुलनात्मक उदाहरण
मनोज मुन्तशीर महाशय
महाकाव्य का फ़िल्म स्क्रिप्ट में एडॉप्शन का उत्कृष्ट उदहारण देखना है तो 1981 में प्रदर्शित हुई श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित फ़िल्म. "कलयुग " देखते...... महाभारत का मॉर्डन एरा एडॉप्शन है कलयुग....... बिजनेस टाइकून दो भाइयों कि आपसी लड़ाई को बहुत बढियाँ तरीक़े से आज के समय ढाला कि भावनाये आहत हुए बिना महाभारत बना दी..........कर्ण बने थे शशिकांत kapoor, कृष्ण अमरीश पूरी, कुंती सुषमा श्रेष्ट, द्रौपदी rekha, सुप्रिया पाठक सुभद्रा, अर्जुन अनन्त नाग, दुर्योधन बने थे विक्टर बैनर्जी और बहुत बहुत थिएटर के अनमोल कलाकार
1981 में बना थ्रीलर बेस्ड प्लॉट और महाभारत कि कथा...... पूरी फ़िल्म इतनी कसी स्क्रिप्ट के साथ कि अभी अगर tv पर आती रहती तो देखने बैठ जाती
दूसरी महाकाव्य का स्क्रिप्ट एडॉप्शन है मणि रत्नम द्वारा निर्देशित 2010 में प्रदर्शित हुई फ़िल्म रावन...... इस फ़िल्म में आज के युग में रावण के दृष्टिकोण को सकारात्मक रूप से दिखाया था यानि कि ये कहें रावण को एक अपराधी होने के बाद भी एक सकारात्मक रूप में दिखाया था...... Dev ( vikram ) पुलिस में है जिसके चलते जंगलों में रहने वाला अपराधी बीरा ( अभिषेक बच्चन ) कि बहन ( priyamani )का पुलिस कस्टडी में रेप होता और इस वजह से वो आत्महत्या कर लेती...beera अपनी बहन का बदला लेने के लिए dev कि पत्नी रागिनी ( ऐश्वर्या राय ) अपहरण कर लेता है..... Dev जंगलो का दूत संजीवनी ( गोविंदा ) कि मदद से रागिनी तक पहुँचता है और उसे बीरा कि कैद से आज़ाद कर लेता है पर beera भाग जाता है.... Dev beera के बच के निकल जाने को अपनी हार मनाते हुए रागिनी पर beera को लें कुछ ऐसे इल्जाम लगाता कि रागिनी उन्हें जानने के beera से मिलने जाती और dev धोखे से beera कि हत्या कर देता है
रावण,रामायण के मुख्य पात्रों और प्रसंग को लें एक कहानी दिखाती जिसमे अंतर बस इतना कि नायक और खलनायक के चरित्रो कि अदला बदली दिखती....... ए आर रहमान का संगीत, गुलज़ार के गीत केरल के खूब खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य और ऐश्वर्या राय कि खूबसूरती नें इस फिल्म को मुझे 4 -5 बार दिखवा ही दिया और गाने तो all time fav है ही
दोनों में ही हमारे धर्म के महान महाकाव्य के प्रसंग और किरदार को लिया गया पर नाम जगह गुण धर्म में उचित परिवर्तन कर किसी भी तरह कि धार्मिक भावनाओं को. आहत होनेसे भी बचा लिया और फिर भी फ़िल्म कि रूचि को बढ़ा दिया आजके समय से जोड़ कर
तो मनोज मुन्तशीर साहेब ये जो आप कांड करें है उसे देख ये तो समझ आ रहा है कि प्रोडक्शन हाउस नें आपको कुछ न लिखने कि मोटी रकम दी है तभी अधकचरा माल निकला है और जिस तरह आप और ओम राउत नें मिलकर रामायण को बर्बाद कर दिखाने कि कोशिश कि उससे आधे खर्चे और कोशिश में सौ गुना बेहतर रामायण बन जाती.......
चंद पैसो के लिए अपने धर्म को छलने वाला किसका सगा होगा?
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