मीनाक्षीसुंदरेश्वर
सबसे पहले "south indian girls are best for marriage"
अब पूछो why तो रुको जरा सब्र करो बताते है।
मीनाक्षी सुंदरेश्वर फ़िल्म के प्रमुख पात्रों के नाम के साथ साथ मदुरै के मीनाक्षी अम्मन या मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर के आधार पर भी है ।मीनाक्षी मंदिर भगवान शिव के सुंदरेश्वर रूप और देवी पार्वती के मीनाक्षी अवतार के पाणिग्रहण संस्कार का प्रतीक है इसीलिए यहां विवाह करने का अपना महत्व है और फ़िल्म की शुरुवात भी यही से होती है ।
अभिमन्यु दासानी की आवाज़ सूत्रधार के रूप मंदिर के महत्व को बताते हुए मीनाक्षी सुंदरेश्वर प्रमुख पात्र के विवाह पर आती है ।यूं देखा जाए कहानी कुछ नही बाकी कहना चाहे तो नव विवाहित जोड़े के परिस्थिति के चलते लांग डिस्टेंस रिलेशनशिप में जाने की और frustrated होने की फिर मिलने की बात है बस।
फ़िल्म मदुरै के दो परिवारों से शुरू हो वहीं खत्म हो जाती है ।कुछ नया नही हाँ पर जो मेरी तरह गांव शहर छोड़े हुए तमिलियन है उन्हें फ़िल्म की विशुद्ध तमिलियन परिवार की प्रतिदिन की जिंदगी,रीति रिवाज,वेशभूषा ,खान पान और पर्दे पर तमिलनाडु की हरियाली देखना अच्छा लगेगा।
पर जो तमिलियन है और विदेशी न हुए है उन्हें फ़िल्म जरा भी न भा रही ।भर भर के 1 रेटिंग दिए है IMdb पर ।
यूं बोले तो एक जोड़ा है थोड़ा उलझन मेंऔर माँ पिता है जैसे ऊंघते हुए बोल रहे अच्छा शादी करनी कर लो ,अच्छा नौकरी पर जाना जाओ ,अच्छा लड़ना है लड़ लो,अच्छा गुस्सा हो अलग होना हो लो wtf 🤷
कुछ funny दृश्यों के बाद भी आधी फ़िल्म के बाद आप सच में डाबरा में ले कॉफ़ी पीने चले जायेंगे मतलब की फ़िल्म को किस कैटेगरी में रखूं संमझ न पा रही ?
रोमान्टिक
लव स्टोरी
फैमिली ड्रामा
या रिचुअल बताने वाली 2 घण्टे को डॉक्यूमेंट्री??
सेकंड हाफ तक फ़िल्म में थोड़ा थ्री इडियट वाला तड़का आ जाता फिर आधे घण्टे बाद मीनाक्षी नही मानेगी कहते हुए 2 स्टेट वाली फीलिंग्स आने लगेगी 🤔🤔
फ़िल्म के मुख्य पात्र मीनाक्षी बनी सान्या मलहोत्रा बॉडी लैंग्वेज से बिल्कुल नही लगी एक तमिलियन लड़की जबकिं दिखाने की कोशिश की गई तमिलिइन लड़की की तरह well educated,well cultured ,well dress up और बिल्कुल पारम्परिक वेशभूषा वाली पर साड़ी में सान्या दंगल की रेस्टलर ही लगी ।
भाग्य श्री के पुत्र अभिमन्यु दासानी की ये दूसरी फिल्म है लेकिन इसमें अभिमन्यु बेकार साबित हुए ।शर्मिला लड़का बनने के चक्कर में वो उल्लू और ओवरएक्टिंग करते हुए नज़र आये। उनकी पहली फ़िल्म मर्द को दर्द नही होता में अच्छी एक्टिंग देखने के बाद सुंदरेश्वर की भूमिका मे उन्हें देखना कुछ ऐसा हुआ कि जैसे सुनील शेट्टी को बलवान फ़िल्म के बाद धड़कन फ़िल्म में देख
लिया हो 🤢🤢🤢
कमजोर फ़िल्म ने बाकी सह कलाकारों केलिए कुछ नही छोड़ा ।फ़िल्म के निर्देशक विवेक सोनी की ये पहली फ़िल्म इसके पहले अलग अलग कार्य के साथ रा वन, उड़ता पंजाब आदि से जुड़ चुके है।तमिल तेलगु फ़िल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक डायरेक्टर जस्टिन प्रभाकरन का म्यूजिक उतना प्रभवशाली नहीं साबित हुआ।
क्यों देखे : अगर किसी तमिलियन लड़की से इलु इलु चल रहा तो,अगर अपने कल्चर को छोड़ कहीं और रह रहे तो,अगर तमिलनाडु प्राकृतिक सुंदरता देखनी हो तो
क्यों न देखें : अगर आप बहुत जिज्ञासु है यानी बाल की खाल निकालने वाले तो
(तमिलियन लड़कियों की तारीफ कर चुकी हूं सान्या की बात करते हुए )
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