house of death part 2
भाग 2
"ये क्या मज़ाक है ?परेशान एक अजनबी से ये किस तरह का मज़ाक है ? अनिकेत दर्द और डर से चिल्लाया तभी कमरे में भयानक अंधेरा छा जाता है खुले दरवाज़े बन्द होने लगते और उन तीनों के हँसने की डरावनी आवाज़ तेज़ होने लगती ।
अंधेरे में अनिकेत दरवाज़े की तरफ भागता है लेकिन दरवाजा बन्द होता ।कमरे में भयानक डरावनी आवाज़ें गहराने लगती जो जैसे कोई संदेश दे रही हो वो रहस्यमयी डरावनी आवाज़ तेज़ होती जा रही " तुम यहाँ खुद से नही आये हो तुम्हे मैंने बुलाया है अपने इस घर में जहां से तुम जा नही सकते .....नही नही जा सकते " वो डरावनी आवाज़ औरत की चीखती हुई गुम हो जाती है और अचानक कमरा फिर रोशनी से भर जाता है लेकिन ??
लेकिन ये क्या वो लड़की वो वृद्ध उसकी पत्नी कोई नही है कमरे और दरवाज़े खिड़कियां बन्द
अनिकेत बेतहाशा डर के साथ चिल्लाते हुए दरवाज़े की हैंडल को घुमाने लगता है "खोलो दरवाजा खोलो "
तभी दरवाज़े के दूसरी तरफ पैरों की आवाज़ आनी शुरू होती ।अनिकेत चुप हो दरावाज़े से पीछे हटने लगता कि तभी दरवाज़ा खुल जाता है ।
खटक !!!!
गलियारे में सिर्फ मोमबत्ती की रोशनी और रोने की आवाज़ जो दूसरे कमरे से आ रही थी ।
अनिकेत अपने दर्द को भूल तेज़ी से बाहर के दरवाजे की ओर बढ़ता है पर दरवाज़ा नही खुलता
और तभी बगल के कमरे का दरवाजा खुलता है ।कमरे में गहरा अंधेरा और उस अंधेरे को डरावना करती एक लड़की के रोने की आवाज़ ।
डरा हुआ अनिकेत जेब से लाइटर निकाल उसकी रोशनी में में आगे बढ़ते हुए "कौन है वहां कौन "चिल्लाता है
धड़ाम!!! अंधेरे में अनिकेत किसी इंसान पर गिरता है और चिल्लाता है "नही ये कैसे हो सकता है "डर के मारे अनिकेत चीखता हुआ । जमीन पर गिर वो इंसान कोई और नही उस एंग्लो इंडियन लड़की की लाश थी।
बदहवास खुद को घसीटता हुआ अनिकेत बाहर निकालता है
"मुझे बाहर निकालो ......कोई है "अनिकेत पर पुरी तरह से मौत का डर हावी हो चुका है और अब ये घर उस डर से ज्यादा खतरनाक हो गया है ।अनिकेत खुद को घसीटते हुए उसी लिविंग रूम में लाता है कि शायद कोई खिड़की खोल कर वो भाग सके ।
दर्द और डर से रोते हुए अनिकेत खुद को सोफे के सहारे खड़ा कर पर्दा हटा खिड़की खोलने की कोशिश कर ता है मगर ये क्या
खिड़की के सहारे दो लाशें खड़ी है .....लाशें उसी बूढ़े आदमी की और उसकी पत्नी की।
अनिकेत चीख के साथ बेहोश हो जाता है ।
खिडकी के हटे पर्दों से आती सूरज की रोशनी अनिकेत की बेहोसी तोड़ती है।
"आह ....."दर्द से कराहता अनिकेत होश में आते ही घबड़ा कर कमरे में चारों तरफ देखता है और आश्चर्य से चीखता है "अरे ये क्या वो लाशें कहाँ गयी ??
खुद को संभालते हुए अनिकेत बाहर को जाने वाले गलियारे की ओर भागता है और बाहर के दरवाजे पर पहुंच उसे खोलता है
"खटाक" दरवाज़ा एक बार में ही खुल जाता है अनिकेत बिना कुछ सोचे बाहर की ओर भागता है । एक ही सांस में अनिकेत बोर्ड तक सफर तय कर लेता है और देखता है कि उस बोर्ड के पास लोग घेरा बना कर खड़े है ।
शायद ये अनिकेत के लिए सबसे सुखद पल था ।वो भीड़ के पास पहुंच कर लोगो से पूछता है लेकिन उसकी बात का कोई जवाब नही मिलता ।अनिकेत भीड़ से निकल उस बात तक पहुंचता है और ये पल अनिकेत के लिए सबसे डरावना पल हो जाता है
"नही नही ....ये नही हो सकता है नहिईईई "अनिकेत चीखते हुए खुद की लाश को टटोलने लगता है और बदहवास हो भीड़ के एकं आदमी के सामने जा चीखता है "मैं मर नही सकता .....मैं जिंदा हूँ मुझे देखो ......ये ये कोई बहुत बुरा सपना है .....मैं मर नही सकता ...नही "
अनिकेत की आत्मा रोटी चीखती है लेकिन मौत के खेल के बाद उसे कोई सुन नही सकता
भीड़ में आवाज़ तेज़ होती जा रही है अनिकेत के मृत शरीर को सील करते हुए पुलिस भीड़ को हटाती
भीड़ के हटने के साथ ही बोर्ड पर लिखा सच दिखने लगा
"हाउस ऑफ डेथ "
अगले दिन के अखबार की खबर थी
"तांत्रिक बुढ़िया के रहस्यमय घर के पास एक और लाश मिली ....पुलिस के अनुसार मृत्यु बेहोसी की हालत में ठंड के कारण हुई पर स्थानीय लोग में अफवाहों का बाजार गर्म है कि अजनबी की मौत के पीछे भी तांत्रिक बुढ़िया की आत्मा है"
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डर पैदा करने वाली कहानी
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