house of death part 1
House of death
मनाली की बर्फीले सड़क पर जब रात का साया गहराता है तो एक अनजाना से भय चारों ओर फैलने लगता है।डर मौत का ....डर अनजाने सायों का ....उफ ये काली रात कितनी भयवाह होती है अपने अनसुलझे रहस्य लिए हुए
कोहरे में गुम ये सुनसान सड़क और ये कार
घर्रर्ररर....घर्रर्ररर
"उफ़्फ़ मनाली की बर्फीली सर्द रात और मेरी कार का ये नाटक" कार के इंजन को स्टार्ट करने असफल कोशिश करते हुए अनिकेत झल्लाया
"लगता है आज यही ठंड से मेरी कब्र बनेगी " गुस्से और नाकामी संग खुद से बात करते हुए अनिकेत कार से उतरा और खुद को सिमेटते हुए सड़क के किनारे किसी देवदूत के आने का इंतज़ार करने लगा
खुद को गर्म करने के लिए सिगरेट का कश लेने की उम्मीद से जेब टटोली पर नाकामी ही हाथ लगी
"Shit इसे भी न मिलना था अभी ...आज तो लगता है बस अपनी मौत का इंतज़ाम कर निकल हूँ" सर्द बर्फ़ीली रात में यूं फँसना अनिकेत के दिल और दिमाग पर हावी हो चुका था।सड़क के किनारे गाड़ी पार्क कर अनिकेत किसी मदद की उम्मीद में सड़क के ढलान वाले मोड़ की ओर बढ़ने लगा ।
दिमाग ठंड से सुन्न हो रहा था लेकिन अनिकेत के कदम तेज़ी पर थे
"आह ....आह "ठोकर किसी चीज़ से ठोकर लगने से अनिकेत गिर गया और बहुत तेज़ी से लुढ़कते हुए ढलान के अंत की ओर जाने लगा
"आह ...आह .....उफ़्फ़"अचनाक किसी बोर्ड के रास्ते में आने से अनिकेत उससे टकरा कर रुक गया "आह ओह गॉड मेरा घुटना ...आह "अनिकेत थोड़ा संभलते हुए बोला
अनिकेत का घुटना बुरी तरह से छिल गया था अब तो अनिकेत इस सर्द बर्फ़ीली रात में चल कर भी मदद न ढूढ़ सकता था
"आह ..आह "बोर्ड की सहायता से अनिकेत किसी तरह खड़ा होता है और तभी उसे संमने कहीं से आती रोशनी की झलक दिखती है ।
"आह....रोशनी ....जरूर कोई होगा .....शय्याद मुझे मदद मिले कोई "अनिकेत ने खुद में हिम्मत जगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की
दर्द के साथ पैरों को घसीटते हुए अनिकेत आगे बढ़ने लगा और जैसे जैसे वो रोशनी के करीब बढ़ता गया वो खुद को एक लकड़ी के घर के करीब पाता है।
"इस सुनसान ढलान पर ये घर और उसमें रोशनी ? अनिकेत ने खुद से सवाल किया "पर कोई चारा भी नही चोट लगे इस पैर के साथ कहीं और जाने का "
अनिकेत ने खुद को उस घर के दरवाजे तक पहुंचाया और दरवाजे पर दस्तक दी।
"कोई है ....(खट खट खट) कोई है (खट खट खट)" अनिकेत दर्द और डर दोनो के साथ बेतहाशा दरवाजा पीटने लगा
अंदर से आवाज़ आयी "जो भी अंदर आ जाओ दरवाजा खुला है और बाहर बहुत ठंड " आवाज़ एक सामान्य सी पुरुष की
"दरवाजा खुला है पर?अनिकेत ने बुदबुदाते हुए हल्के से दरवाजे को छुआ और सच में दरवाजा खुल गया
अनिकेत भय संग गैलरीनुमा रास्ते से अंदर बढ़ने लगा और उसके बढ़ने के साथ रोशनी भी तेज होने लगी
रास्ता कमरे में जा खत्म होता जहां मोमबत्तियों की रोशनी है और कमरे में .....तभी अनिकेत के बायीं ओर एक लड़की बोली "अरे आपको तो पैर में चोट लगी है"
इतने करीब से आयी आवाज़ से अनिकेत डर के साथ चौंक गया और मुड़ते हुए बोला "हाँ ..हाँ ...वो मैं...मैं ....सड़क के ढलान से किसी पत्थर से टकरा कर गिर गया और लुढ़कते हुए इस घर तक आ गया .....आह"
अब बगल खड़ी उस लड़की का चेहरा साफ साफ देख सकता था ।वो 25 साल की एंग्लो इंडियन लड़की थी ...खूबसूरत चेहरा ,कंधे तक के बाल और गोरा शरीर गर्म कोट से ढंका था ।
"आप कुर्सी पर बैठे और इस घर में कोई मेडिसिन बॉक्स जैसी चीज है कि नही मैं ढूंढती" उस लड़की ने कमरे में पड़ी कुर्सी की ओर इशारा करते हुए कहा
"इस घर?? मतलब ये आपका घर नही है "अनिकेत ने थोड़ा असहज होते हुए पूछा कि तभी दाई ओर से आवाज़ आयी
"नही अजनबी नौजवान ...हम तीनों का ये घर नही और चौथे तुम " एक वृद्ध की आवाज़ थी ये
अनिकेत मुड़ा तो संमने खाने की टेबल पर मोमबत्ती की रोशनो में उसे दो लोग बैठे दिखे
एक वो वृद्ध, दूसरी वो अधेड़ महिला
"मतलब ...मतलब आप लोग भी यहाँ मेरी तरह बर्फीले तूफान में फंस कर आये है? ओह नो ..."अनिकेत परेशान हो आगे बढ़ते हुए चिल्लाया
"हाँ ....शय्याद"वृद्ध ने कहा
"हाँ शय्याद ??? आप पहेलियां क्यों बुझा रहे है ....एक मिनट ....मुझे दूर दूर तक कोई गाड़ी या साधन नही दिखा जो घर के आस पास हो जिससे आप लोगो के आने का पता चले ....फिर फिर कैसे आये आप यहाँ और कौन हो आप लोग ? किस का है ये घर ??"अनिकेत डर और परेशानी से सवाल दागता चला गया
"मैं बताती हूँ "वो लड़की बोली"हम चारों एक दूसरे के लिए अजनबी है और हालात ने इस घर तक पहुंचाया "
"मैं यहाँ घूमने आयी थी ...मेन रोड पर कुछ फोटो केलिए उतरी लेकिन अंधेरा गहराते ही कुछ गुंडों से खुद को बचाने के लिए इस घर की राह पकड़ी" लड़की बात को पूरी करते हुए बोला
"और हम पति पत्नी को टैक्सी ड्राइवर ने बेहोसी की दवा खिला लूटने के बाद उसी हालत में इस घर के सामने छोड़ दिया ....और हमने यहां खुद को छिपा लिया " वृद्ध ने अपनी कहानी बताई
"और मैं गाड़ी खराब होने के कारण यहाँ शरण ली "अनिकेत बुदबुदाया "पर आप लोगो में से कौन यहां पहले आया "
"हा हा हा....नौजवान सवाल ये नही की कौन कैसे यहाँ पहुंचा ....सवाल ये है कि कौन यहाँ से पहले निकल पाता है "वृद्ध ने अजीब सी हंसी संग बोला
"क्या क्या मतलब है आपका कौन पहले निकल पाता है ......नही नही आप क्या कहना चाहते है क्यों पहेलियां बुझा रहे है .....साफ साफ बताइए " अनिकेत ने किसी अनजाने भय संग लडखडाती हुई आवाज़ में बोला
"बॉय ये घर आने देता अपनी मर्ज़ी से है पर आपका बाहर जाना ये घर तय करता " अब वृद्ध का चेहरा और आवाज़ बहुत रहस्यमयी हो गयी थी
वृद्ध की बात खत्म होते ही मोमबत्तियों की लौ बिना हवा झिलमिलाने लगती है और कमरा हद से ज्यादा सर्द और रहस्यमयी हो जाता है ।
क्रमशः........
क्या है उस घर का रहस्य ?
कौन है वो लड़की और वो वृद्ध जोड़ा
क्या अनिकेत उस घर के रहस्य बचकर निकल पायेगा?
pic courtesy shutter.com
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